बिहार सरकार का कृषि विभाग (उद्यान निदेशालय) 6 से 8 फरवरी, 2026 तक पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में 'बागवानी महोत्सव-2026' का आयोजन करने जा रहा है। इस भव्य आयोजन का मुख्य उद्देश्य बिहार के किसानों, महिलाओं, युवाओं और उद्यमियों को उन्नत तकनीक, बाजार और रोजगार के अवसरों से जोड़कर उनकी आय में वृद्धि करना तथा कृषि को एक सफल उद्यम में बदलना है।
यह महोत्सव किसानों को उन्नत किस्मों, गुणवत्तापूर्ण पौध/बीज, आधुनिक संरक्षित खेती जैसे पॉली हाउस और शेडनेट की तकनीकों से परिचित कराएगा। इसके साथ ही, प्रसंस्करण, मूल्यवर्धन, पैकेजिंग, भंडारण तथा विपणन की बारीकियों को समझाकर 'घर-घर समृद्धि' का मार्ग प्रशस्त करेगा।
महोत्सव में राज्य भर से लगभग 1500 किसानों की सक्रिय सहभागिता अपेक्षित है, जबकि 60 से अधिक स्टॉल और प्रदर्शनियों के माध्यम से 10,000 से अधिक विविध बागवानी उत्पादों का प्रदर्शन किया जाएगा। इनमें फल, फूल, सब्जियाँ, मशरूम, मखाना, मधु, औषधीय एवं सुगंधीय पौधे शामिल होंगे। आगंतुक यहाँ उच्च गुणवत्ता की नर्सरी, बीज/रोपण सामग्री, बागवानी यंत्र तथा फल-सब्जी के प्रसंस्कृत उत्पादों का प्रदर्शन देखने के साथ-साथ उन्हें क्रय भी कर सकेंगे।
महोत्सव के मुख्य आकर्षणों में नई तकनीक व नई किस्मों का जीवंत प्रदर्शन, प्रत्यक्षण और विशेषज्ञ परामर्श शामिल हैं। उच्च मूल्य वाली खेती जैसे स्ट्रॉबेरी, ड्रैगन फ्रूट, चेरी टमाटर, बीजरहित खीरा, रंगीन शिमला मिर्च, जरबेरा व उन्नत गुलाब जैसी फसलों पर विशेष मार्गदर्शन दिया जाएगा। प्रसंस्करण, कोल्ड-चेन, पैकेजिंग और बाजार सम्बद्धता हेतु कृषक समूहों, स्टार्ट-अप तथा क्रेता-विक्रेता सम्बद्धता पर भी जोर दिया जाएगा। राज्य में फल एवं सब्जी के विकास हेतु स्थापित दो सेंटर ऑफ एक्सीलेंस सहित मधु, स्ट्रॉबेरी, चाय, शुष्क बागवानी और आम आदि पर प्रशिक्षण व प्रत्यक्षण की जानकारी भी उपलब्ध होगी। इसके अलावा, बागवानी योजनाओं और अनुदान से जुड़ने के लिए एक विभागीय हेल्पडेस्क भी मौजूद रहेगा।
बिहार में बागवानी फसलों की खेती लगभग 13.48 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में की जाती है, जिससे करीब 287 लाख टन उत्पादन प्राप्त हो रहा है। राष्ट्रीय स्तर पर मखाना, लीची एवं मशरूम उत्पादन में बिहार की अग्रणी पहचान हमारी 'मेहनत की मिट्टी' का प्रमाण है।
बिहार सरकार के कृषि विभाग के प्रधान सचिव ने इस अवसर पर अपने संदेश में कहा, “बागवानी महोत्सव–2026 हमारे किसान भाइयों-बहनों की मेहनत का उत्सव है। यह केवल एक प्रदर्शनी नहीं, बल्कि किसानों की आय बढ़ाने, युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने और 'खेती को उद्यम' बनाने की दिशा में एक ठोस कदम है। सरकार की प्राथमिकता है कि किसान को गुणवत्तापूर्ण पौध, आधुनिक तकनीक, प्रसंस्करण-सुविधा और बाजार तक सीधी पहुँच मिले। आइए—सीखें, जुड़ें और बिहार के हर किसान परिवार के घर समृद्धि की लौ जलाएँ।”
यह महोत्सव किसान, एफपीओ, स्वयं सहायता समूह, उद्यमी, कृषि-स्टार्ट-अप, छात्र-छात्राएँ एवं आम नागरिक सभी के लिए खुला रहेगा, ताकि वे तकनीकी नवाचार और रोजगार/उद्यम के अवसरों का लाभ उठा सकें।