बिहार कृषि विश्वविद्यालय (BAU), सबौर के सबौर एग्री इन्क्यूबेटर्स (SABAGRIs) ने कृषि नवाचार और ग्रामीण उद्यमिता को अभूतपूर्व बढ़ावा दिया है। SABAGRIs ने पाँच महत्वपूर्ण कृषि-आधारित स्टार्टअप्स के साथ समझौता ज्ञापन (MoA) पर हस्ताक्षर किए हैं।
गौरतलब है कि इन सभी स्टार्टअप्स को राष्ट्रीय कृषि विकास योजना–रफ़्तार (RKVY-RAFTAAR) के अंतर्गत कुल ₹50 लाख की भारी वित्तीय स्वीकृति प्रदान की गई है। इस राशि में से, ₹32.50 लाख की पहली किस्त जल्द ही जारी की जाएगी, जो इन उद्यमियों को अपने कार्यों को तेजी से बढ़ाने में मदद करेगी।
यह महत्वपूर्ण MoA विश्वविद्यालय की ओर से SABAGRIs के परियोजना अन्वेषक (PI) सह नोडल अधिकारी, डॉ. अनिल कुमार सिंह और संबंधित पाँचों स्टार्टअप्स के सह-संस्थापकों द्वारा हस्ताक्षरित किया गया।
आपको बता दें कि चयनित स्टार्टअप्स डेयरी प्रबंधन, ऑर्गेनिक उत्पाद विकास, उच्च क्षमता वाली ड्रायर तकनीक और आधुनिक एग्री-टेक नवाचार जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में काम कर रहे हैं। इनका मुख्य लक्ष्य किसानों की आय में वृद्धि, उपज का मूल्य संवर्धन, ग्रामीण क्षेत्रों में रोज़गार सृजन और उत्पादकों का बाज़ार से सीधा जुड़ाव सुनिश्चित करना है।
इस अवसर पर बोलते हुए कुलपति, बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर, डॉ. डी.आर. सिंह ने जोर देकर कहा कि यह समझौता ज्ञापन बिहार के कृषि-आधारित स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूती देने वाला एक निर्णायक कदम है। उन्होंने कहा, "SABAGRIs और RKVY के सहयोग से नवाचार, उद्यमिता और कृषि विकास को एकीकृत रूप से आगे बढ़ाया जा रहा है। ये स्टार्टअप्स किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ बिहार को कृषि नवाचार के राष्ट्रीय मानचित्र पर नई पहचान दिलाएंगे।" उन्होंने आगे जोड़ा कि विश्वविद्यालय शोध, तकनीक, मेंटरशिप और अधोसंरचना उपलब्ध कराकर युवा उद्यमियों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है।
वहीं निदेशक शोध, BAU सबौर और SABAGRIs के नोडल अधिकारी व PI, डॉ. अनिल कुमार सिंह ने बताया कि SABAGRIs के माध्यम से हम शोध, नवाचार और उद्यमिता को प्रयोगशाला से लेकर खेत और बाज़ार तक जोड़ने का कार्य कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि RKVY फंडिंग से चयनित ये युवा उद्यम डेयरी, ऑर्गेनिक और ड्रायर तकनीक में नए मानक स्थापित करेंगे।
यह पहल पूर्वी भारत में SABAGRIs की बढ़ती भूमिका को भी दर्शाती है, जो स्टार्टअप्स को तकनीकी मार्गदर्शन, वित्तीय सहायता, बाज़ार संपर्क और नीति समर्थन उपलब्ध कराने वाला अग्रणी कृषि इन्क्यूबेशन केंद्र बन चुका है। यह ठोस कदम बिहार की कृषि अर्थव्यवस्था को तकनीक-सक्षम, उद्यमशील और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।