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पशुपालन

पटना में बिल्लियों का जलवा: पशु विज्ञान विश्वविद्यालय में अनोखा कैट शो, 'द कैट' पुस्तक का भी विमोचन

Raushan Kumar Raushan Kumar
Updated 10 January, 2026 8:52 PM IST
पटना में बिल्लियों का जलवा: पशु विज्ञान विश्वविद्यालय में अनोखा कैट शो, 'द कैट' पुस्तक का भी विमोचन

पटना। बिहार पशु विज्ञान विश्वविद्यालय (बीएएसयू) के बिहार पशु चिकित्सा महाविद्यालय परिसर में शनिवार को निदेशालय प्रसार शिक्षा द्वारा एक भव्य कैट शो का सफल आयोजन किया गया। इस अनूठे आयोजन में कुल 48 बिल्लियों ने अपने पालकों के साथ भाग लिया, जिन्होंने विभिन्न नस्लों की अपनी खूबसूरती और अदाओं से दर्शकों का मन मोह लिया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य पशु प्रेम को बढ़ावा देना, पालतू जानवरों के वैज्ञानिक प्रबंधन के बारे में जागरूकता फैलाना और मानव-पशु बंधन के महत्व पर प्रकाश डालना था।


इस कैट शो में पर्शियन, इटालियन, जर्मन, पंचमुखी, हिमालयन, बॉम्बे, फेरेट तथा इंडियन कंट्री ब्रीड जैसी कई आकर्षक नस्लों की बिल्लियों को प्रदर्शित किया गया। इस दौरान उनके स्वास्थ्य, व्यवहार और वैज्ञानिक प्रबंधन से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां भी साझा की गईं, जिससे पशुपालकों और आम नागरिकों को काफी लाभ हुआ।


कार्यक्रम के मुख्य अतिथि, बिहार सरकार के शिक्षा विभाग के परामर्शी बैद्यनाथ यादव ने पशुओं के प्रति बढ़ते प्रेम पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि लोग अब स्ट्रे एनिमल्स को अपनाने के प्रति भी जागरूक हो रहे हैं, जो एक सकारात्मक बदलाव है। यादव ने इस बात पर जोर दिया कि “पशु पालने से मानव शरीर पर सकारात्मक फिजियोलॉजिकल प्रभाव पड़ता है, जिससे व्यक्ति और उनका परिवार अधिक खुश रहता है।” उन्होंने लोगों से स्थानीय नस्लों की बिल्लियों को अपनाने पर विशेष ध्यान देने का आग्रह भी किया।


आयोजन समिति के अध्यक्ष सह निदेशक, प्रसार शिक्षा, डॉ. निर्मल सिंह दहिया ने बताया कि पालतू पशु पालने से व्यक्ति का 'हैप्पीनेस इंडेक्स' बढ़ता है और वे 'फील गुड फैक्टर' प्रदान करते हैं। आयोजन सचिव डॉ. मो. मोईन अंसारी ने इस बात पर प्रकाश डाला कि बिल्लियां मनुष्य को संवेदनशीलता के साथ रहना सिखाती हैं और जिस घर में पालतू पशु होते हैं, वहां खुशियां अधिक होती हैं। सह-आयोजन सचिव डॉ. रविकांत निराला ने बिल्लियों के शरीर में मौजूद विशेष ग्रंथियों (ग्लैंड्स) और उनसे निकलने वाले हार्मोनों का उल्लेख किया, जो उन्हें चमकदार और स्वच्छ रखते हैं। उन्होंने बिल्लियों की भविष्य की घटनाओं को भांपने की अद्भुत क्षमता पर भी प्रकाश डाला, जिससे यह स्पष्ट होता है कि उनसे घृणा करने की कोई आवश्यकता नहीं है।

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इस महत्वपूर्ण अवसर पर “द कैट: हेल्थकेयर एंड साइंटिफिक मैनेजमेंट” नामक एक पुस्तक का भी विमोचन किया गया। यह पुस्तक बिल्लियों पर आधारित अपने प्रकार की पहली वैज्ञानिक पुस्तक है, जिसे कुलपति द्वारा फॉरवर्ड किया गया है। इसका संपादन डॉ. निर्मल सिंह दहिया, डॉ. मो. मोईन अंसारी, डॉ. रियाज सिद्दीकी, डॉ. रविकांत निराला, डॉ. अनिल और डॉ. श्रेया तिवारी जैसे विशेषज्ञों ने किया है, जो बिल्लियों के वैज्ञानिक प्रबंधन और स्वास्थ्य देखभाल पर विस्तृत जानकारी प्रदान करती है।


प्रतियोगिता में विभिन्न श्रेणियों में बिल्लियों को पुरस्कृत किया गया, जिसमें पर्शियन (फीमेल) वर्ग की सुश्री इरम फातिमा की बिल्ली 'जारा' को 'ओवरऑल चैंपियन' का खिताब मिला। डॉ. एस.पी. शर्मा (सेवानिवृत प्रोफेसर और हेड, वेटरनरी सर्जरी) और डॉ. संजीव कुमार (सेकंड-इन-कमांड, 9 एन.डी.आर.एफ) ने निर्णायक की भूमिका निभाई। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में पशुप्रेमी, छात्र और आम नागरिक उपस्थित रहे, जिन्होंने आयोजन को लेकर जबरदस्त उत्साह दिखाया। इस सफल कैट शो ने न केवल पालतू जानवरों के प्रति जागरूकता बढ़ाई बल्कि मानव और पशुओं के बीच के अनमोल रिश्ते को भी मजबूत किया।

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