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कृषि समाचार

शिवराज सिंह चौहान का ऐलान: कृषि में नवाचार और प्राकृतिक खेती बनेगी नई पहचान

AgriPress Staff AgriPress Staff
Updated 24 July, 2025 12:44 PM IST
शिवराज सिंह चौहान का ऐलान: कृषि में नवाचार और प्राकृतिक खेती बनेगी नई पहचान

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गुरुवार को समस्तीपुर के डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा में आयोजित चतुर्थ दीक्षांत समारोह में हिस्सा लिया। इस अवसर पर उन्होंने विक्रमशिला छात्रावास और आर्यावर्त अंतरराष्ट्रीय अतिथि गृह का उद्घाटन किया। साथ ही, दो महत्वपूर्ण पुस्तक में पूसा बिहार: दी बर्थप्लेस ऑफ एग्रीकल्चरल रिसर्च एंड एजुकेशन और टेक्स्टबुक ऑन नेचुरल फॉर्मिंग का विमोचन किया।


अपने संबोधन में चौहान ने बिहार की समृद्ध सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत की प्रशंसा की। उन्होंने कहा, मिथिलांचल का प्रवेश द्वार समस्तीपुर है। यह राजा जनक और माता सीता की पावन भूमि है, जो भारतीय नारियों का आदर्श हैं। उन्होंने भारत रत्न डॉ. राजेंद्र प्रसाद और कर्पूरी ठाकुर को श्रद्धांजलि दी और बिहार को प्रतिभा और मेहनत का केंद्र बताया, जिसने विश्व को बुद्ध का संदेश दिया।



छात्रों को प्रेरित करते हुए चौहान ने कहा, आप अनंत शक्तियों के भंडार हैं, जैसा स्वामी विवेकानंद ने कहा था। मेहनत करें, बड़े लक्ष्य बनाएं और अपने ज्ञान को कृषि क्षेत्र में उपयोग करें। पूसा विश्वविद्यालय से मिली शिक्षा के साथ आप भारत की कृषि को नई ऊंचाइयों तक ले जाएंगे। उन्होंने पिछले 11 वर्षों में कृषि क्षेत्र में 40% उत्पादन वृद्धि, 80 करोड़ लोगों को मुफ्त अनाज, और 50 हजार करोड़ रुपये के बासमती चावल निर्यात जैसी उपलब्धियों का जिक्र किया। बिहार में मक्का, लीची और मखाना उत्पादन की वृद्धि की सराहना करते हुए उन्होंने मखाना बोर्ड के गठन के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धन्यवाद दिया।


चौहान ने कृषि को भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ और किसानों को उसकी आत्मा बताया। उन्होंने कहा, किसानों की सेवा हमारा धर्म है। हमें प्रति हेक्टेयर उत्पादन बढ़ाने, छोटी मशीनों से मशीनीकरण लाने और स्टार्टअप के जरिए आधुनिकता को बढ़ावा देने की जरूरत है। प्राकृतिक खेती पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि यह मिट्टी की सेहत के लिए आवश्यक है। उन्होंने हाल ही में घोषित प्रधानमंत्री धन धान्य योजना का उल्लेख किया, जिसके तहत 100 जिलों में कृषि उत्पादन बढ़ाने का लक्ष्य है।


उन्होंने छात्रों से आह्वान किया कि वे अपने ज्ञान और अनुसंधान को व्यावहारिक रूप दें और भारत की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करें। चौहान ने विश्वविद्यालय की भूमिका की सराहना करते हुए कहा, "डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय भारत की कृषि को नई दिशा दे सकता है। मैं नए विचारों के लिए हमेशा उत्सुक हूँ।



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विश्वविद्यालय की उपलब्धियां और पुरस्कार

दीक्षांत समारोह में 37 छात्र-छात्राओं को गोल्ड मेडल सहित 800 छात्रों को डिग्रियां प्रदान की गईं। विजिटर गोल्ड मेडल (यूजी टॉपर्स) फिशरीज कॉलेज, ढोली: काश्वी काजल (2019-23 बैच में 9.062 OGPA के साथ प्रथम स्थान प्राप्त किया। PDUCH&F, पिपराकोठी: पार्ना चटर्जी (2020-24 बैच में 9.044 OGPA के साथ शीर्ष स्थान हासिल किया। विश्वविद्यालय गोल्ड मेडल (कॉलेज-वार यूजी टॉपर्स) TCA, ढोली: सचिन प्रिया (2019-23 में 8.802) और अनिकेत (2020-24 में 8.871) ने OGPA के साथ प्रथम स्थान प्राप्त किया। फिशरीज कॉलेज, ढोली: तनिष्का चौधरी (2020-24 में 8.902) से अपने बैच में शीर्ष स्थान हासिल किया। PDUCH&F, पिपराकोठी: स्वस्तिका ने 8.884 OGPA के साथ उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। कॉलेज ऑफ एग्रीकल्चरल इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी: अंशीका राय और अंकित कुमार ने 8.832 और 8.308 OGPA के साथ प्रथम स्थान प्राप्त किया। कॉलेज ऑफ बेसिक साइंसेज एंड ह्यूमैनिटीज: इशिता ईशा और सीमा बिस्वास ने 8.701 और 8.753 OGPA के साथ शीर्ष स्थान हासिल किया। कॉलेज ऑफ कम्युनिटी साइंस: मुस्कान और मधुस्मिता नहाक ने 8.564 और 8.518 OGPA के साथ प्रथम स्थान प्राप्त किया। विश्वविद्यालय गोल्ड मेडल (पीजी टॉपर्स) PGCA-क्रॉप इम्प्रूवमेंट: बिश्वजीत कुमार और शंभवी कुमार ने 8.700 और 8.88 OGPA के साथ शीर्ष स्थान हासिल किया PGCA-NRM: सौरव शाह और सौम्या ने 8.764 और 8.80 OGPA के साथ प्रथम स्थान प्राप्त किया। PGCA-सोशल साइंस: अंकिता दास और लिम्बू सुब्बा ने 8.821 और 8.98 OGPA के साथ उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। PGCA-क्रॉप प्रोटेक्शन: सृष्टि और रिमली दास ने 9.083 और 8.77 OGPA के साथ शीर्ष स्थान हासिल किया। CAE&T: सौविक पाल और राजत सिंह ने 8.837 और 8.51 OGPA के साथ प्रथम स्थान प्राप्त किया। CBS&H: नवीं और नंद सरिता ने 8.823 और 8.58 OGPA के साथ शीर्ष स्थान हासिल किया। कॉलेज ऑफ कम्युनिटी साइंस: सुष्री और सलोनी कुमार ने 8.851 और 8.77 OGPA के साथ प्रथम स्थान प्राप्त किया। स्कूल ऑफ एग्री-बिजनेस एंड रुरल मैनेजमेंट: सुन लवली और स्वाती स्वांगटिका ने 8.564 और 8.59 OGPA के साथ शीर्ष स्थान हासिल किया। वाइस-चांसलर गोल्ड मेडल (पीएचडी टॉपर्स) PGCA: डाबाब्रता नाथ (2019-22) और जीविता जी. एन. (2020-23) ने 8.832 और 8.716 OGPA के साथ शीर्ष स्थान प्राप्त किया। 2022-24 पीजी, एमबीए (ABM & RM), और 2021-24 पीएचडी बैचों के परिणाम अभी लंबित हैं, और डिग्रियां दिसंबर 2024 तक नोटिफिकेशन के बाद प्रदान की जाएंगी। छात्रों को दीक्षांत समारोह से संबंधित किसी भी अपडेट के लिए विश्वविद्यालय की वेबसाइट से संपर्क में रहने की सलाह दी गई है।


उपस्थित गणमान्य समारोह में केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर, बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा, सूचना एवं जनसंपर्क मंत्री महेश्वर हजारी, सांसद शांभवी चौधरी, और विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. पी.एस. पाण्डेय उपस्थित थे।



विश्वविद्यालय का इतिहास डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा की स्थापना 7 अक्टूबर 2016 को हुई, जब 1970 में स्थापित राजेंद्र कृषि विश्वविद्यालय को केंद्रीय विश्वविद्यालय में परिवर्तित किया गया। यह कृषि अनुसंधान और शिक्षा में अग्रणी संस्थानों में से एक है।


प्राकृतिक खेती और नवाचार पर जोर चौहान ने प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि यह न केवल मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने बल्कि किसानों की आय बढ़ाने में भी मदद करेगा। विकसित कृषि संकल्प अभियान जैसे प्रयासों के जरिए सरकार वैज्ञानिकों और किसानों को एक मंच पर ला रही है।


शिवराज सिंह चौहान ने पूसा के दीक्षांत समारोह में कृषि में नवाचार और प्राकृतिक खेती को नई पहचान बनाने का संकल्प जताया। उनके इस दृष्टिकोण से बिहार और देश की कृषि को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।

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