भारत सरकार के उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले उपभोक्ता मामले विभाग द्वारा पूर्वी राज्यों में उपभोक्ता संरक्षण तंत्र को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। विभाग ने आज पटना के होटल ताज सिटी सेंटर में “पूर्वी राज्यों में उपभोक्ता संरक्षण पर एक दिवसीय कार्यशाला” का सफलतापूर्वक आयोजन किया।
इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य पूर्वी राज्यों में उपभोक्ता अधिकारों को लेकर जागरूकता बढ़ाना और उनके प्रभावी क्रियान्वयन पर गहन विचार-विमर्श करना था। उद्घाटन सत्र में बिहार के मुख्य सचिव श्री प्रत्यय अमृत, भारत सरकार के उपभोक्ता मामले विभाग की सचिव श्रीमती निधि खरे, अपर सचिव श्री अनुपम मिश्रा और बिहार सरकार के खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के सचिव श्री अभय कुमार सिंह जैसे उच्च अधिकारियों ने भाग लिया।
इस बात की जानकारी देते हुए मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि अब वह समय आ गया है जब सरकार को नागरिकों को केवल कल्याणकारी सेवाओं के लाभार्थी के रूप में नहीं, बल्कि उपभोक्ताओं के रूप में देखना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि उपभोक्ता स्पष्ट जानकारी, निष्पक्ष व्यवहार, समयबद्ध समाधान और जवाबदेह परिणाम के हकदार होते हैं, जो अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
मुख्य सचिव ने कहा कि किसी भी ऐप या प्रणाली के डिजाइन में आम आदमी को केंद्र में रखना आवश्यक है। उन्होंने ई-जागृति प्रणाली का उदाहरण देते हुए कहा कि इसके माध्यम से 45 करोड़ रुपये का रिफंड जनरेट होना एक बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि जब कोई व्यक्ति कोई सामान या सेवा खरीदता है, तो उसकी अपेक्षाएं सरल और तात्कालिक होती हैं—उत्पाद सुरक्षित हो, किफायती हो और समस्या आने पर प्रभावी समाधान उपलब्ध हो।
वहीं, भारत सरकार के उपभोक्ता मामले विभाग की सचिव श्रीमती निधि खरे ने उपभोक्ता संरक्षण को एक सामूहिक जिम्मेदारी बताया। उन्होंने बताया कि नागरिकों और उपभोक्ताओं के अधिकारों की प्रभावी रूप से रक्षा करना हमारी प्राथमिकता है। उन्होंने जानकारी दी कि ई-जागृति को एक मॉडल के रूप में अपनाते हुए राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (नेशनल कंज्यूमर हेल्पलाइन) ‘1915’ का गठन किया गया है। विशेष रूप से, आईआईटी कानपुर के सहयोग से एनसीएच 2.0 के अंतर्गत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) टूल्स का सफलतापूर्वक उपयोग किया जा रहा है।
श्रीमती खरे ने इस पहल की सफलता के आंकड़े साझा करते हुए बताया कि मात्र आठ महीनों की अवधि, यानी मई 2025 से दिसंबर 2025 के बीच, प्रभावी उपभोक्ता शासन के कारण उपभोक्ताओं को 45 करोड़ रुपये का रिफंड दिलाया गया है। यह आंकड़ा प्रभावी शिकायत निवारण और उपभोक्ता अधिकारों की सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होता है।