बिहार के कृषि मंत्री राम कृपाल यादव ने हाल ही में प्रस्तुत राज्य बजट को कृषि विभाग के दृष्टिकोण से 'विकासोन्मुखी, भविष्योंन्मुखी एवं किसान-हितैषी' करार दिया है। उन्होंने शुक्रवार को एक बयान जारी कर कहा कि यह बजट राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करने के साथ-साथ युवाओं एवं महिला किसानों के लिए रोजगार के नए अवसरों का सृजन करेगा। मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि एग्री स्टार्टअप के माध्यम से कृषि उत्पादों के मूल्य संवर्धन को बढ़ावा मिलेगा, जिससे किसानों की आय में वृद्धि सुनिश्चित होगी और ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि आधारित आर्थिक गतिविधियों को गति मिलेगी।
श्री यादव ने कहा कि बजट में कृषि को लाभकारी, टिकाऊ एवं आधुनिक बनाने की स्पष्ट प्रतिबद्धता दिखाई देती है। उन्होंने कृषि विभाग की उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि कृषि रोडमैप के प्रभावी कार्यान्वयन के फलस्वरूप वर्ष 2005 से अब तक खाद्यान्न उत्पादन में तीन गुना से अधिक की वृद्धि हुई है। वित्तीय वर्ष 2024-25 के अंतिम आकलन के अनुसार, राज्य में 326.62 लाख मीट्रिक टन खाद्यान्न उत्पादन हुआ है, जो अब तक का सर्वाेच्च स्तर है।
उन्होंने बिहार की कृषि क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर उपलब्धियों का भी जिक्र किया। वर्ष 2024-25 में बिहार ने मखाना एवं लीची उत्पादन में देश में प्रथम, मक्का में द्वितीय, शहद में चतुर्थ, चावल में पाँचवाँ तथा गेहूँ में छठा स्थान प्राप्त किया है। यह विशेष रूप से उल्लेखनीय है कि देश में उत्पादित कुल मखाना का 85 प्रतिशत बिहार में होता है। मखाना उत्पादन को बढ़ावा देने हेतु राज्य में राष्ट्रीय मखाना बोर्ड का गठन किया गया है।
डिजिटल कृषि पहल पर बात करते हुए मंत्री ने बताया कि कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों के लिए डिजिटल कृषि निदेशालय का गठन कर एकीकृत डेटाबेस प्रबंधन को सुदृढ़ किया गया है। राज्य के सभी 38 जिलों में जलवायु अनुकूल कृषि कार्यक्रम के अंतर्गत 190 मॉडल कृषि गाँव विकसित किए जा रहे हैं। मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना के तहत 3 लाख मिट्टी नमूनों का विश्लेषण किया गया है तथा 32 अनुमंडल स्तरीय मिट्टी जाँच प्रयोगशालाओं की स्थापना की जा रही है।
श्री यादव ने कहा कि बिहार देश में मशरूम उत्पादन में भी अग्रणी है, जहाँ वर्तमान में 44,000 मीट्रिक टन उत्पादन हो रहा है। किसानों को बेहतर मूल्य दिलाने हेतु भंडारण, कोल्ड स्टोरेज, प्रसंस्करण एवं विपणन को प्राथमिकता दी जा रही है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में 91 प्रकार के कृषि यंत्रों पर 40 से 80 प्रतिशत तक अनुदान उपलब्ध कराया जा रहा है तथा एआई युक्त यांत्रिक कृषि मिशन के गठन की दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।
राज्य सरकार के संकल्प के तहत बिहार एपी इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन का गठन कर प्रारंभिक चरण में एक लाख करोड़ रुपये के निवेश का लक्ष्य रखा गया है। इसके अंतर्गत छंटाई एवं ग्रेडिंग यूनिट, कोल्ड चेन चौम्बर्स, गोदाम एवं प्रोसेसिंग सेंटरों की स्थापना की जाएगी। साथ ही, सुगंधित चावल की किस्मों, श्री अन्न, नकदी एवं एक्जोटिक फसलों के उत्पादन, प्रसंस्करण एवं निर्यात को बढ़ावा दिया जाएगा।
मंत्री ने बताया कि बिहार को कृषि स्टार्टअप हब के रूप में विकसित करने, जी॰आई॰ टैग प्राप्त उत्पादों के लिए समर्पित बाजार उपलब्ध कराने तथा ग्रामीण हाटों के समग्र विकास हेतु बिहार कृषि एक्सीलेरेशन मिशन के गठन की प्रक्रिया चल रही है। राज्य के 53 कृषि उपज बाजार प्रांगणों के आधुनिकीकरण का कार्य प्रगति पर है, जिनमें से 20 बाजार ई-नाम से जुड़ चुके हैं।
किसानों को आर्थिक सहायता प्रदान करने के उद्देश्य से राज्य सरकार द्वारा प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की तर्ज पर 'जननायक कर्पूरी ठाकुर किसान सम्मान निधि योजना' प्रारंभ की जाएगी, जिसके अंतर्गत किसानों को प्रतिवर्ष 3000 रुपये अतिरिक्त सहायता प्रदान की जाएगी।
सात निश्चय-3 (वर्ष 2025-2030) के अन्तर्गत विकासात्मक एवं लोक कल्याणकारी कार्यक्रम के संकल्प के अधीन दलहनी फसलों के कुल उत्पादन 3.93 लाख मीट्रिक टन को लगभग 11.27 लाख मीट्रिक टन, तेलहनी फसलों के कुल उत्पादन 1.24 लाख मीट्रिक टन को लगभग 4.81 लाख मीट्रिक टन, मक्का का कुल उत्पादन 66.02 लाख मीट्रिक टन को लगभग दोगुना 133.05 लाख मीट्रिक टन तथा फलों का आच्छादन 2.58 लाख हे० से बढ़ाकर अगले 05 वर्षों में 3.60 लाख हे० एवं कुल उत्पादन 383.91 लाख मीट्रिक टन से बढ़ाकर 679.19 लाख मीट्रिक टन करने तथा सब्जियों का कुल उत्पादन 180 लाख मीट्रिक टन को दोगुना कर 360 लाख मीट्रिक टन करने का लक्ष्य है। चतुर्थ कृषि रोडमैप (2023-28) के अंतर्गत दलहन, तेलहन, मक्का, फल एवं सब्जी उत्पादन को दोगुना करने सहित बीज विकास, फसल विविधीकरण, जैविक खेती, कृषि यांत्रिकरण, जलवायु अनुकूल कृषि, बागवानी विकास, कृषि शिक्षा, अनुसंधान एवं प्रसार से जुड़े कार्यक्रमों का प्रभावी कार्यान्वयन किया जायेगा।