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कृषि समाचार

किसानों की बढ़ी ताकत: 25 जिलों में मिट्टी जांच लैब और 12 प्रक्षेत्रों में कस्टम हायरिंग सेंटर शुरू

AgriPress Staff AgriPress Staff
Updated 10 April, 2026 5:50 PM IST
किसानों की बढ़ी ताकत: 25 जिलों में मिट्टी जांच लैब और 12 प्रक्षेत्रों में कस्टम हायरिंग सेंटर शुरू

पटना के मीठापुर स्थित कृषि भवन में कृषि मंत्री राम कृपाल यादव ने डिजिटल कृषि निदेशालय का विधिवत उद्घाटन किया। 09 अप्रैल 2026 को आयोजित इस कार्यक्रम के दौरान मंत्री ने राज्य के 12 राजकीय बीज गुणन प्रक्षेत्रों में मॉडल कस्टम हायरिंग सेंटर और 25 जिलों के 32 अनुमंडलों में नवनिर्मित मिट्टी जाँच प्रयोगशालाओं का भी लोकार्पण किया। उद्घाटन किए गए केंद्रों में भभुआ, धनरूआ, नवादा, खिरियावाँ, सिपाया, पिपराकोठी, पूसा, हलसी, सिकन्दरा, ओडेहारा, कुमारखण्ड और बुआलदह के बीज गुणन प्रक्षेत्र शामिल हैं।


राम कृपाल यादव ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि नरेंद्र मोदी और नीतीश कुमार के कुशल नेतृत्व में बिहार का कृषि विभाग किसानों के हित में लगातार काम कर रहा है। डिजिटल कृषि निदेशालय की स्थापना कृषि रोड मैप के तहत की गई है, जिसका मुख्य उद्देश्य राज्य के किसानों को रियल टाइम में योजनाओं का लाभ पहुँचाना है। इस निदेशालय के माध्यम से डिजिटल क्रॉप सर्वे, मौसमवार और फसलवार उत्पादन का पूर्वानुमान, और किसानों के लिए एक एकीकृत डेटाबेस प्रबंधन प्रणाली विकसित की जाएगी। यह कदम कृषि क्षेत्र में पारदर्शिता और तकनीक के समावेश का एक नया युग है।


मंत्री ने बताया कि इस निदेशालय के जरिए किसानों को डिजिटल सॉइल हेल्थ कार्ड उपलब्ध कराए जाएंगे और पौधा संरक्षण के लिए ड्रोन तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। साथ ही, डिजिटल जेनरल क्रॉप एस्टीमेशन सर्वे के तहत हर मौसम में फसल कटनी प्रयोगों का संचालन और आंकड़ों का संग्रहण डिजिटल माध्यम से होगा। इससे फसल आच्छादन और उत्पादकता का सटीक आकलन संभव हो पाएगा।


योजना के अन्य पहलुओं की जानकारी देते हुए राम कृपाल यादव ने कहा कि 12 जिलों में स्थापित मॉडल कस्टम हायरिंग सेंटर पीपीपी मोड में संचालित होंगे। इन केंद्रों पर 25 प्रकार के आधुनिक कृषि यंत्र उपलब्ध कराए गए हैं, जिनका उपयोग आस-पास के गाँवों के किसानों को प्रशिक्षण देने और प्रक्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण बीज उत्पादन के लिए किया जाएगा। वहीं, 32 अनुमंडल स्तरीय मिट्टी जाँच प्रयोगशालाओं की स्थापना वित्तीय वर्ष 2025-26 में की गई है, ताकि रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग को कम किया जा सके और मिट्टी के स्वास्थ्य को बेहतर बनाकर किसानों की आय में वृद्धि की जा सके।