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कृषि समाचार

नमामि गंगे योजना के तहत जैविक कृषि मेला: किसानों को मिला मिट्टी की उर्वरता और पर्यावरण संरक्षण का मंत्र

AgriPress Staff AgriPress Staff
Updated 15 February, 2026 9:05 AM IST
नमामि गंगे योजना के तहत जैविक कृषि मेला: किसानों को मिला मिट्टी की उर्वरता और पर्यावरण संरक्षण का मंत्र

फतेहपुर के हथगाम विकास खंड के अब्दुल्लापुर बाकर में कृषि विभाग की सर्विस प्रोवाइडर ग्रीनरी एग्री बिजनेस प्राइवेट लिमिटेड के तत्वावधान में 'नमामि गंगे' योजना के तहत एक भव्य जैविक कृषि मेला और प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। इस मेले में 300 से अधिक किसानों ने कृषि वैज्ञानिकों और मास्टर ट्रेनरों द्वारा बताए गए जैविक और प्राकृतिक खेती के महत्वपूर्ण सिद्धांतों और फायदों को ध्यानपूर्वक सुना और समझा। ग्राम प्रधान जितेंद्र कुमार लोधी की अध्यक्षता में इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ, जिसका उद्देश्य किसानों को टिकाऊ और पर्यावरण-अनुकूल कृषि पद्धतियों के प्रति जागरूक करना था।


कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित डॉ. ओ.पी. वर्मा, सेवानिवृत्त संयुक्त निदेशक, कृषि विभाग, भारत सरकार ने जैविक खेती के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह मिट्टी की उर्वरता को बनाए रखती है, पर्यावरण को सुरक्षित रखती है और स्वस्थ फसल उत्पादन में सहायक होती है। उन्होंने फसल चक्र, मिश्रित फसल और पशुपालन के एकीकृत उपयोग को जैविक खेती के प्रमुख अंग बताया। डॉ. शिवमंगल सिंह, सेवानिवृत्त प्रोफेसर, चंद्रशेखर आज़ाद कृषि विश्वविद्यालय ने नीम के औषधीय और कृषि उपयोग पर विस्तृत जानकारी दी, जिससे किसान अपनी फसलों को प्राकृतिक रूप से सुरक्षित रख सकें।


प्राकृतिक खेती के प्रशिक्षक रमाकांत तिवारी ने जीवामृत और बीजामृत बनाने और उनके उपयोग का सजीव प्रदर्शन कर किसानों को इनकी उपयोगिता से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि ये प्राकृतिक घोल कैसे मिट्टी की सेहत सुधारते हैं और पौधों को पोषण देते हैं। मास्टर ट्रेनर बीरेंद्र सिंह यादव ने बिना रसायन के फेरोमैन ट्रैप और ग्लू ट्रैप का उपयोग करके कीट नियंत्रण की लागत प्रभावी तकनीकों पर जोर दिया, जिससे किसानों की आय बढ़ाई जा सके। अमित श्रीवास्तव ने औषधीय खेती से होने वाले लाभों के बारे में जानकारी दी, जिससे किसान अपनी आय के स्रोतों में विविधता ला सकें।


इस मेले में पीएम श्री योजना, किसान सम्मान निधि और यंत्रीकरण योजना जैसी विभिन्न सरकारी योजनाओं की विस्तृत जानकारी भी किसानों को प्रदान की गई, जिससे वे सरकारी सहायता का लाभ उठा सकें। कार्यक्रम का एक मुख्य आकर्षण श्रेष्ठ भारत संस्थान के कलाकारों द्वारा प्रस्तुत नुक्कड़ नाटक 'जैविक खेती जीवन नई दिशा' रहा, जिसने मनोरंजक तरीके से जैविक खेती के फायदों को उजागर किया। कार्यक्रम का सफल संचालन आलोक गौड़ और शिव सिंह सागर ने संयुक्त रूप से किया। इस आयोजन को सफल बनाने में प्रोजेक्ट कोऑर्डिनेटर रमेश पटेल, विकास कुमार, बृजेश सिंह यादव, अनुपम सिंह चौहान, राहुल सिंह और रामौतार सहित अन्य सदस्यों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह मेला किसानों को जैविक और प्राकृतिक खेती की ओर प्रेरित करने में मील का पत्थर साबित हुआ।