डॉ. राजेन्द्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा में आयोजित छह दिवसीय कर्मयोगी प्रबंधन विकास कार्यक्रम का समापन समारोह सम्पन्न हुआ। इस कार्यक्रम के तहत विश्वविद्यालय के 40 कर्मचारियों एवं पदाधिकारियों को वित्तीय प्रबंधन, प्रशासनिक दक्षता तथा वैयक्तिक विकास के विभिन्न आयामों पर प्रशिक्षण दिया गया।
कार्यक्रम में देशभर के प्रख्यात विषय विशेषज्ञों ने सहभागिता की और प्रतिभागियों को व्यावहारिक ज्ञान से अवगत कराया।
समापन समारोह को संबोधित करते हुए कुलपति डॉ. पी. एस. पांडेय ने कहा कि विश्वविद्यालय की सबसे बड़ी पूंजी उसका मानव संसाधन है। विश्वविद्यालय केवल भवन और बुनियादी ढांचे से उत्कृष्ट नहीं बनता, बल्कि वहां कार्यरत लोग उसे उत्कृष्ट बनाते हैं। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय का लक्ष्य अपने सभी कर्मचारियों, पदाधिकारियों और शिक्षकों को विश्वस्तरीय और दक्ष बनाना है। इस प्रशिक्षण के बाद कर्मचारियों की कार्यक्षमता में निश्चित रूप से वृद्धि होगी।
उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम लगातार आयोजित किए जाएंगे, क्योंकि विश्वविद्यालय को अंतरराष्ट्रीय स्तर का बनाने के लिए यहां कार्यरत मानव संसाधन का भी अंतरराष्ट्रीय स्तर का होना आवश्यक है।
विशिष्ट अतिथि के रूप में पूर्व संयुक्त निदेशक, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) डॉ. कन्हैया चौधरी ने कहा कि वे सामान्यतः प्रशिक्षण देने जाते हैं, लेकिन आरपीसीएयू के कर्मचारी अत्यंत जिज्ञासु और सीखने के प्रति उत्सुक हैं। यही कारण है कि विश्वविद्यालय हर क्षेत्र में तेजी से प्रगति कर रहा है। उन्होंने डिजिटल एग्रीकल्चर, दीक्षारंभ कार्यक्रम और प्राकृतिक खेती के क्षेत्र में विश्वविद्यालय की पहल की सराहना करते हुए कहा कि इन मॉडलों को देश के अन्य विश्वविद्यालयों में भी अपनाया जा रहा है।
आईसीएआर के मुख्य वित्त एवं लेखाधिकारी डॉ. सुनील कुमार दास ने कहा कि आरपीसीएयू के कार्यों की सराहना देश के विभिन्न राज्यों, विशेषकर महाराष्ट्र में भी होती है। विश्वविद्यालय अन्य संस्थानों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन रहा है। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों को विशिष्ट और सक्षम बनाने के लिए कुलपति द्वारा निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।
कार्यक्रम के दौरान कुलसचिव डॉ. पी. के. प्रणव ने प्रशिक्षण के विभिन्न आयामों की विस्तृत जानकारी दी, जबकि नियंत्रक डॉ. पी. के. झा ने भी अपने विचार साझा किए। मंच संचालन सहायक प्राध्यापक डॉ. रमनदीप सिंह ने किया और धन्यवाद ज्ञापन डॉ. आर. किरण द्वारा प्रस्तुत किया गया।