बिहार विधानसभा के अष्टादश सत्र के दौरान आज कृषि मंत्री राम कृपाल यादव ने कृषि विभाग से संबंधित विभिन्न प्रश्नों पर सदन में विस्तारपूर्वक उत्तर प्रस्तुत किए। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार ग्रामीण मंडियों के सुदृढ़ीकरण पर विशेष ध्यान दे रही है और आगामी पाँच वर्षों में बिहार को दलहन उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने के लिए महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं। यह जवाब सदस्यों श्याम रजक एवं अमरेन्द्र कुमार द्वारा राज्य में मंडियों के निर्माण तथा दाल उत्पादन से जुड़े सवालों के क्रम में आया।
कृषि मंत्री राम कृपाल यादव ने फसलों के क्रय-विक्रय हेतु मंडी निर्माण से संबंधित प्रश्न के उत्तर में सदन को अवगत कराया कि पटना जिला अंतर्गत पटना सिटी, मुसल्लहपुर, दानापुर, बिहटा, फतुहाँ, बाढ़ एवं मोकामा में कृषि बाजार प्रांगण स्थापित हैं। उन्होंने बताया कि फुलवारी एवं पुनपुन प्रखंड के किसानों के लिए निकटवर्ती मुसल्लहपुर बाजार प्रांगण उपलब्ध है, जिससे किसानों को अपनी उपज के विपणन में सुविधा प्राप्त हो रही है। मंत्री ने आगे बताया कि प्रखंड एवं पंचायत स्तर पर ग्रामीण मंडियों के सुदृढ़ीकरण का कार्य राज्य सरकार के 'सात निश्चय' कार्यक्रम के अंतर्गत किया जा रहा है। इस क्रम में पुनपुन प्रखंड स्थित जाहिदपुर ग्रामीण मंडी को भी सुदृढ़ किए जाने की योजना शामिल है।
मंत्री ने स्पष्ट किया कि 'बिहार राज्य कृषि उपज बाजार (निरसन) अधिनियम, 2006' लागू होने के उपरांत बाजार समितियों को निरसित कर दिया गया है। ऐसी स्थिति में नई मंडियों के निर्माण के स्थान पर पुरानी एवं जर्जर मंडियों के जीर्णोद्धार तथा प्रखंड स्तरीय हाट-बाजार एवं ग्रामीण मंडियों के सुदृढ़ीकरण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वर्तमान में नई मंडी के निर्माण का कोई प्रस्ताव सरकार के समक्ष विचाराधीन नहीं है। पटना जिला के मुसल्लहपुर एवं बिहटा बाजार प्रांगण के आधुनिकीकरण का कार्य बिहार राज्य पुल निर्माण निगम लिमिटेड, पटना द्वारा कराया जा रहा है, जिसकी कृषि विभाग द्वारा निरंतर समीक्षा की जा रही है ताकि आधुनिकीकरण एवं विकास के उपरांत इन बाजार प्रांगणों का लाभ पटना, फुलवारी शरीफ एवं पुनपुन के किसानों को बेहतर ढंग से मिल सके।
दलहन उत्पादन से संबंधित प्रश्न के उत्तर में कृषि मंत्री राम कृपाल यादव ने सदन को अवगत कराया कि बिहार राज्य के परिप्रेक्ष्य में दलहन फसलें प्रोटीन का प्रमुख स्रोत हैं। उन्होंने बताया कि नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूट्रीशन के अनुसार प्रति व्यक्ति प्रतिदिन 25 ग्राम दाल की आवश्यकता होती है। इस आवश्यकता को पूरा करने और दलहन उत्पादन में वृद्धि के उद्देश्य से राज्य सरकार द्वारा कृषि रोडमैप के अंतर्गत विभिन्न योजनाओं के माध्यम से दलहन फसलों को प्रोत्साहित किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री द्वारा दलहन की खेती को प्राथमिकता देते हुए चालू वर्ष में विशेष “दलहन में आत्मनिर्भरता मिशन” लागू किया गया है, जिसके लिए 93.75 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। इसके अतिरिक्त राज्य योजना के अंतर्गत 30 करोड़ रुपये व्यय का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। दलहन बीज प्रणाली को सुदृढ़ करने हेतु बीज उत्पादन की कार्ययोजना तैयार की गई है, जिसके अंतर्गत 45,922 क्विंटल प्रमाणित बीज एवं 2,043 क्विंटल आधार बीज का उत्पादन किया जाएगा। साथ ही, 1,15,742 क्विंटल उच्च गुणवत्ता वाले बीज किसानों को अनुदानित दर पर उपलब्ध कराए जाएंगे, जिससे लगभग 4.14 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में दलहनी फसलों का विस्तार संभावित है। मंत्री ने कहा कि प्रसंस्करण एवं विपणन को बढ़ावा देने हेतु दलहन प्रोसेसिंग यूनिट की स्थापना सहित विभिन्न उपाय किए जा रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि आगामी पाँच वर्षों में दलहन उत्पादन के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता प्राप्त करने हेतु दलहन आच्छादन को 4.48 लाख हेक्टेयर से बढ़ाकर 9.19 लाख हेक्टेयर तथा उत्पादन को 3.93 लाख मीट्रिक टन से बढ़ाकर 11.27 लाख मीट्रिक टन तक ले जाने की महत्वाकांक्षी कार्ययोजना पर कार्य किया जा रहा है।