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कृषि समाचार

किसानों की आय बढ़ाने हेतु पशुधन उत्पादकता पर जोर, विशेषज्ञों को मिला अद्यतन ज्ञान

AgriPress Staff AgriPress Staff
Updated 17 February, 2026 6:35 PM IST
किसानों की आय बढ़ाने हेतु पशुधन उत्पादकता पर जोर, विशेषज्ञों को मिला अद्यतन ज्ञान

बिहार पशु विज्ञान विश्वविद्यालय, पटना के प्रसार शिक्षा निदेशालय ने हाल ही में राज्य के सभी कृषि विज्ञान केन्द्रों (केवीके) के पशु एवं मत्स्य विषय विशेषज्ञों के लिए "पशु एवं मत्स्य विज्ञान में तकनीकी सहयोग एवं सुदृढ़ीकरण" विषय पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य क्षेत्रीय स्तर पर वैज्ञानिक तकनीकों के प्रभावी प्रसार को सुनिश्चित करना, पशुधन उत्पादकता में वृद्धि करना तथा अंततः किसानों की आय को सुदृढ़ करने हेतु विशेषज्ञों को व्यवहारिक एवं अद्यतन जानकारी से लैस करना था।


उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि और विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. इन्द्रजीत सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि किसान और पशुपालक समुदाय वैज्ञानिकों की ओर बड़ी उम्मीद से देखता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अधिकांश किसान तकनीक और संसाधनों की दृष्टि से सीमित हैं, इसलिए यह आवश्यक है कि वैज्ञानिक ज्ञान और नवाचार सीधे उनके द्वार तक पहुँचे। डॉ. सिंह ने कृषि के बदलते परिदृश्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जहाँ पूर्व में खेती परंपरागत एवं देशी पद्धतियों से होती थी, वहीं व्यावसायिक प्रवृत्ति के कारण रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता बढ़ी है। उन्होंने समय की मांग को देखते हुए आधुनिक तकनीकों को अपनाते हुए पारंपरिक ज्ञान और जैविक पद्धतियों की ओर पुनः अग्रसर होने का आह्वान किया।


कुलपति ने एथनो वेटरनरी चिकित्सा, यानी पारंपरिक एवं घरेलू पशु उपचार पद्धतियों को बढ़ावा देने पर विशेष बल दिया और सभी कृषि विज्ञान केन्द्रों में औषधीय पौधों की नर्सरी स्थापित करने का सुझाव दिया। उनका मानना था कि इससे प्रतिजैविक दवाओं का उपयोग कम होगा और सूक्ष्मजीव प्रतिरोध की बढ़ती समस्या को नियंत्रित करने में सहायता मिलेगी। डॉ. सिंह ने उन्नत एवं स्वदेशी नस्लों के विकास, स्वच्छ दुग्ध उत्पादन, रोग निदान सुविधाओं की स्थापना, सूक्ष्मदर्शी एवं रक्त परीक्षण यंत्र की उपलब्धता, पशुओं में ऊष्मा की सही पहचान, यूरिया उपचार में सावधानी तथा प्रत्येक केन्द्र में पोल्ट्री हैचरी इकाई की व्यवस्था जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी जोर दिया।


विशिष्ट अतिथि, अटारी, पटना के निदेशक डॉ. अंजनी कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि जब वैज्ञानिक क्षेत्र में जाते हैं तो किसान उन्हें केवल चिकित्सक या वैज्ञानिक के रूप में देखते हैं, न कि किसी विशेष विषय के प्रतिनिधि के रूप में। इसलिए यह आवश्यक है कि सभी विषय विशेषज्ञ पशुपालन, मत्स्य पालन और डेयरी से संबंधित समेकित ज्ञान रखें। उन्होंने नवीन तकनीकों को निरंतर सीखने और स्वयं को अद्यतन रखने की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि वे किसानों को समग्र समाधान प्रदान कर सकें।


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निदेशक प्रसार शिक्षा डॉ. एन. एस. दहिया ने अपने स्वागत संबोधन में बताया कि राज्य में पशुधन की संख्या पर्याप्त है, किंतु उत्पादकता अपेक्षाकृत कम है। उन्होंने कहा कि संतुलित आहार, चारा प्रबंधन, उन्नत प्रजनन तकनीकों के उपयोग तथा वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाने से ही वास्तविक परिवर्तन संभव है और इससे किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार होगा।


प्रशिक्षण कार्यक्रम के तकनीकी सत्रों में विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञों ने विस्तृत व्याख्यान प्रस्तुत किए। डॉ. प्रज्ञा भदौरिया ने किसान-केंद्रित तकनीक परीक्षण एवं अनुप्रयुक्त अनुसंधान की रणनीतियों पर प्रकाश डाला। डॉ. कमल शर्मा ने मत्स्य पालन में तकनीकी हस्तक्षेप एवं उनकी क्षेत्रीय उपयोगिता की जानकारी दी। डॉ. दीप नारायण ने डेयरी प्रबंधन में तकनीकी उपायों एवं उनके व्यावहारिक अनुप्रयोगों पर चर्चा की। डॉ. पंकज कुमार ने पशु पोषण में नवीन प्रगतियों एवं उनके क्षेत्रीय उपयोगों को विस्तार से समझाया।


इसी क्रम में, डॉ. कौशलेंद्र कुमार ने कुक्कुट पालन में नवाचार एवं तकनीकी सुदृढ़ीकरण, डॉ. अमरेंद्र किशोर ने बिहार में सूअर पालन की आजीविका संभावनाओं तथा डॉ. सुचित कुमार ने बकरी पालन में नवीन प्रबंधन पद्धतियों एवं क्षेत्रीय रणनीतियों पर विस्तृत जानकारी प्रदान की। सभी सत्रों में प्रतिभागियों को व्यवहारिक समाधान एवं क्षेत्रीय समस्याओं के निदान हेतु गहन मार्गदर्शन प्रदान किया गया, जिससे वे अपने-अपने क्षेत्रों में किसानों को बेहतर सेवाएँ दे सकें। इस कार्यक्रम का संचालन आयोजन समिति के मार्गदर्शन में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ, जिसमें डॉ. एन. एस. दहिया पाठ्यक्रम निदेशक, डॉ. पंकज कुमार एवं डॉ. प्रज्ञा भदौरिया पाठ्यक्रम संयोजक, डॉ. वाई. एस. जादौन, डॉ. सरोज कुमार रजक एवं डॉ. पुष्पेन्द्र कुमार सिंह समन्वयक तथा डॉ. अनुराधा कुमारी सह-समन्वयक के रूप में सक्रिय भूमिका में रहे।

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